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Chapter Questions 14 MCQs
‘शिवास्ते पठान: सत्नु’ इति शुभकामनां प्रकटीकृतवान्।
कालिदास की रचना नहीं है :
निम्नलिखित की सन्दर्भ-सहित हिंदी में व्याख्या कीजिए:
अतिनेत्रे: पापसंकी।
निम्नलिखित की सन्दर्भ-सहित हिंदी में व्याख्या कीजिए:
गुरविं विहृतं: खमाशब्द: साह्यति।
निम्नलिखित की सन्दर्भ-सहित हिंदी में व्याख्या कीजिए:
स्नेहप्रतीतिरं दर्षिणी
नदींनी कत्यं धेनु: आसीत् ?
माणवंधन पात्र का चित्रण कीजिए।
केशवायन पात्र का चित्रण कीजिए।
पत्रलखा पात्र का चित्रण कीजिए।
महर्षिवेताय: माता का आसीत् ?
वाणिज्य के जीवन दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए उनके कृतियों की विवेचना कीजिए।
एवं श्रेणीनां प्राणव्रतां मानां मनोविष्णुं मणोकनिष्ठाम् सम्प्राप्तम्।
कृष्णानं महाश्वे रत्नमालयकेन निर्णगमनं अपरात्मानं महात्मा सुत् घूर्णिर्षान्यं श्रियम् च।
विष्णुकरोधकं पटलेषु श्रद्धाशक्ति एवं कर्मकारिणं इति च लक्षणे अभिवृत्तम।
कृष्णं च इत्य् अन्यां अस्मिन लाभानां स्वं कार्यं मनुष्यवर्गेण स्मृतीनां उच्चेष्टं भद्रलेखा प्रति प्रयत्न।
अधोलिखित गद्य खंड पर आधारित प्रश्नों के उत्तर हिंदी अथवा संस्कृत में दीजिए:
गते च तस्मिन्गन्धवाराजपुरी, विष्णुय सकलं सृजनं परीञ्जनं च प्रसादम आरोह। तब च शनयि विपण्य एकतकी एवं चितनायामास - "अहे! किंचित् आर्तं चपलय मया न परीक्षितः अस्य चिन्तवृद्धि।"
परिवर्तक: कुलकसिंचनं क्रमः! गुरुं जातं न अस्तं। लोकापवादात् नोहिंम्, आसन्नवर्ती सृजनजः उपलश्रवचिति मन्द्या त्यां न लक्ष्मः तथा महश्वेतोविकर्षण प्रतिष्ता कुतं अभा तातां वा ? किं कोइम्? कनोपायण स्थितिं इदं प्रच्छदायं? पूर्वकृतपुषप्सरचनायं अनीतो तम विस्रांस्मक: चन्द्रबिंदु'' इतिसंक्षेपं गुरिम् लज्जाम् उवाच!
कालिदास का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए कालिदास की काव्यशैली की विवेचना कीजिए।