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Chapter Questions 14 MCQs
दिये गए पंक्तियों पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
जो प्यारे मृदु उपवन या चित्र में बहे हों,
पंखों में जो आकर्षण बलता है, उन बच्चों को।
जो होती सृष्टि उनके सभी गोपनिका की।
जो है चाँद्र वरण-रही और दीप्ती उनसें होती है।
ला के फूल कमल दल को प्रत्यक्ष के सामने ही,
थोड़ा-थोड़ा प्रबल जल से सवः हो दुहना।
दिये गए पंक्तियों पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
अपने जीवन का रस देकर जिसको कला से पाला है,
क्या वह केवल अवसाद-मिलन से आँसू की माला है?
वे लोग होंगे प्रेम जिनसे अनुभव-रस का कटु प्याला है,
वे मृत होंगे प्रेम जिन्हें समर्पणकारी हाला है।
दिये गए पंक्तियों पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
सावधान मस्तिष्क! यदि विज्ञान है तलवार
तो इसे दे फेंक तज़कर मोह स्मृति के पार,
हो चुका है सिद्ध हे तु शिशु अभी नादान,
फूल कांटो की दुले कुछ भी नहीं पहचान,
खेल सकता तू नहीं तो हाथ में तलवार,
कात लें अंग तीतरी है बड़ी यह धारा।
दिये गए पंक्तियों पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
कोई प्यारा कुसुम कुहासा गहे में जो पड़ा होतो प्यारे के चरण पर ला डाल देना उसी कोयह देना है पवन बतला फूल-सी एक बालास्थल हो यह कमल पम को चुमना चाहती है
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
बीती विभावरी जाग री!
अंबर-पनघट में डूबा रही!
तारा-घर उषा-नागरी
खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा,
किसलय का अंबर डोल रहा,
लो यह ललिता भी भर लाई।
मधु मुकुल नवल रस गागर।
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मुझे भूल मत मारो,
होकर मधु के मीत मदन, पग तुम कब, गलन न गारो,
मुझेविषमता, तुम्हें विषमाश्रु, कहाँ, भिन्न परिचय।
नहीं भीगने यह कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल से तो सिंधु-बिंदु यह, यह रस रेन निहारो।
रज – वंद सरोज, तुम्हें तो मेरे पति पर बांधे,
लो, यह मेरी क्षण-पूर्ति, उस रीति के सिर पर धारे।
भाषा और संस्कृति पर आधारित पद्यांश
काटा थी संस्कृति विभाज, भ्रांति
बहु धर्म-जाति-गति रूप-नाम,
बंदी बंध-जीवन, भू बिनाश।
विज्ञान-मृदु, जन प्रकृति-काम,
आये वृद्ध पुरुष, कहली –
मिथ्या जड़ बन्धन, सत्यराम,
नानृतं ज्योति सत्यं, मा भैः,
जय ज्ञान-ज्योति, तुम्हें प्रणाम।
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
निस्सहसे वे चंचल आये,
फेरे तन मेरे रंजन ने नयन इधर मन भाये।
फैला उनके तन का आलाप, मन में सर सरसाये,
छुए वे इस तन और नहीं, वे हंस उड़ छाये।
कहके ध्यान आज इस जन का किसने ये मुस्काये,
फूल उठे वे कंचन, मोर-से वे यवन हुलासे।
स्वागत, स्वागतम्, स्वर, भाष्य से सजे दर्शन प्रिये,
'मन' ने मोती ढाले, लो, वे अक्षु अक्षर ला लाये।
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
सुख भोग खोजने आते सब, आये तुम करने सत्य खोज,
जग की मिट्टी के पुतले जन
तुम आत्मा के मन के मनोज !
जड़ता, हिंसा, स्पर्धा में भर
चेतना, अहिंसा, नम्र ओज,
पशुता का पंकज बना दिया
तुमने मानवता का सरोज !
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
सावधान मनुज! यदि विज्ञान है तलवार,
तो इसे फेंक तजकर मोह, स्मृति के पार।
हो चुका है सिद्ध रे, शिशु अभी अजान,
फूल काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान।
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार,
काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार॥
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मुझे भूल मत मारो,
मैं अकला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो।
होकर मधु के मीत मदन, पटु तुम कटु गरल न गारो,
मुझे विकलता तुम्हें विषमता ठहरो श्रम परिचारी।
नहीं भीगने यह कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल हो तो सिंधु-बिंदु यह - यह हर नैन निहारो।
रूप-दर्प कंचुक तुम्हें तो मेरे पति पर बांधे,
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे॥
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
विस्तृत नभ का कोई कोना,
मेरा न कभी अपना होना,
परिचय इतना इतिहास यही
उमड़ी कल थी मिट आज चली !
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मैं नीर भरी दुःख की बदली।
स्पंदन में चिर निश्चय बसा,
क्रंदन में आहट विषम हँसी,
नयनों में दीपक से जलते
पलकों में निर्झरी मचली!
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मेरे प्यारे नव जलद से कंज से नैन वाले
जोके आये न मधुवन से ओ न भेजा संदेशा।
मैं रो-रो के प्रिय-विरह से बावली हो रही हूँ।
जोके मेरे सब दुख-कथा श्याम को तू सुना दे॥