गद य श पर आध र त प रश न
30 previous year questions.
High-Yield Trend
Chapter Questions 30 MCQs
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:कहते हैं दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है। केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ साधता है। बाकियों को फेंककर आगे बढ़ जाती है। शायद अशोक से उसका स्वार्थ नहीं सधता। क्यों उसे वह याद रखती? सारा संसार स्वार्थ का अखाड़ा ही तो है।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश: पृथ्वी के विलय रंगमंच में सभी जातियों के लिए समान क्षेत्र है। मनुष्य के मार्ग से प्रभावित पृथ्वी उसकी करके एक जीव का अधिकार है। निकट जन पीछे, छोड़कर राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। उत्तप्त राज्य के पुरखें अंग की सुघ्र हमे लेनी होगी। राज्य के एक अंग में यदि अंधकार और बिवलता का निवास है, तो सम्पूर्ण राष्ट्र का स्वास्थ्य उठने अंग में असमर्थ रहा।
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए
वसुदेवशरण अग्रवाल:
तुम मांसहीन, तुम रक्तहीन,
हे अस्थशेष, हे अस्तहीन,
तुम शुद्धबुद्ध आत्माकेवल,
हे चिरपुराण! हे चिर नवीन।
तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
जिसमें असार भव-शून्यलीन,
आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समसीन।
जलवायु के फटे कितने उत्थान
दीन, कच्छुए इन्होंने - उत्तराय;
किन्तु वह बढ़ी रहे द्रुत मूर्ति
अन्युद्दय कर रही उपाय।
शक्ति के विभिन्न, जो व्यस्त
विकल बिसरे हैं, हो निष्क्षय;
सम्पन्न अवस्थ को समस्त
विज्ञानिनी मानवता हो जाय।
दिये गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
निरंतर में गुज़ार करते और जीवन के घटनाओं में भी निश्चय रूप से हर्ष हैं। महात्मा गांधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उन्होंने कहा था, उनके पथ पर चलने वाले यदि गलत दिशा में बढ़ते हैं, तो उनकी पूरी होती नहीं। उनके पीछे की गिरावटों में अपनी होती है। लेकिन उनका कड़ी संघर्ष करना और जागरूकता सुनने-सिखाने के गुणाना करने का अलग बात है। इस पूरी शक्ति से समाजिक करने के फैसले का प्रभाव यही है!
दिये गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
जन का प्रवास अनंत होता है! महलों बच्चों से भूमि के साथ राष्ट्रीय जन ने तात्कालिक प्रयास किया। जब तक सूर्य की रश्मि निर्यात-प्रकाश रुपक का अनुपम से भर देती है तब तक सूर्य ही जन का जीवन भी अमर है! इतिहास के अनेक उत्तर-चयन कर करने के बाद भी राष्ट्र-निवासी जन ने उत्थान लहरें से आगे बढ़ने के लिए आज भी असर-अमर है! जन का संतमुखी जीवन नदी के प्रवाह की तरह, अपने कर्म और ज्ञान द्वारा उद्यान के उनके घाटों का निर्माण करता होता है!
दिये गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पृथ्वी और आकाश के अंतराल में जो सामीप्य भी है, पृथ्वी के क्षारों और फैले हुए गंभीर सागर में जो ज्वार और लहरों की रचनाएँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और विज्ञान के नए भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। एक ही नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जागरूकता की नई किरणों जब तक नहीं फूटती हैं, तब तक हम सभी हुए के समान हैं। विज्ञान और उध्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया रूप ढलना चाहिए। यह कार्य सतत, उसका और अगले परिवर्तन द्वारा निरंतर होने बढ़ना चाहिए। हमारा दायित्व यही है कि राष्ट्र में जितने लोग हैं, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना नहीं रहेगा।
दिये गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। संस्कृत परंपरा से मुक्त होने पर भी परिवर्तनीय और गतिशील है। इसकी गति विज्ञान की प्रणालियों के साथ जोड़ी जाती है।वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उन्नति के संस्कृतिक हलचलें सामाजिक रूप से भाषा के पर्यावरणीय प्रभाव की खोज की बड़ी आवश्यकता है।
अधोलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
आजाद भारत में दुर्गा पूजा के अवसर और समय प्राप्त हुआ। मकसद ने उन्हें नतमस्तक किया था। वह घुटने टेक चुके थे।
उनके सम्मान में आयोजित यह समारोह नुस्सारुल मुसलमान के जख्म 51 बरसों से ताजा रखे हुए था।
यह सब कुछ किसी एक परंपरा या किसी खास मजहब के विरोध में नहीं था।
बल्कि इस सच को सिद्ध करने की कोशिश थी कि भारत में सहअस्तित्व का एक बड़ा समाज कायम रहा है।
उपयुक्त गद्यांश से सम्बंधित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
गद्यांश:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना भिन्न विधियाँ हैं और वे उसे प्रबल रखती हैं। इस प्रवृत्ति से वह बार-बार चक्कर खाता है और निवृत्ति चाहता है। यह प्रवृत्ति और निवृत्ति का चक्र उसके हृदय से थकान मिटाता है, किंतु इस संसार की अभी राग-भोग से वह चाहता है कि अगले क्षण उतने ही भाव-विकार से वह उसका विनाश चाहता है।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
मैंने बहुतों को रूप से पाते देखा था, बहुतों को धन से और गुणों से भी बहुतों को पाते देखा था, पर मानवता के आंगन में समर्पणऔर शांति का यह अद्भुत सौंदर्य स्वरूप आज अपनी ही आँखों से देखा कि कोई अपनी पीड़ा से किसी को पाये और किसी का उत्तम संदर्भ किसी की पीड़ा के लिए ही सुनिश्चित रहे।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
निंदा का उद्गम ही हीनता और कमजोरी से होता है।मनुष्य अपनी हीनता से डरता है। वह दूसरों की निंदा करके ऐसा अनुभव करता है कि वे सब निकृष्ट हैं और वह उनसे अच्छा है।
उपर्युक्त गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
पहले मैं आपको अपनी सबसे बड़ी विशेषता बताना चाहूँ।
संस्कृत-साहित्यस्य अनुसंवेदन के गुण: सज्जानते?
बौद्ध युगे फच्छिल सिद्धान्त: कस्य होते: प्रमुखता आत्म?
महामना मालवीय: वाराणसी - नगरे के विश्वविधायाश्य संस्कृतमं कोट?
दुर्धर्ष: कस्य प्रश्नावत आस्थात चलोलभन्त?
निम्नलिखित में से किसी दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में उत्तर दीजिए:
बौद्ध युगे फच्छिल सिद्धान्त: कस्य होते: प्रमुखता आत्म?
निम्नलिखित में से किसी दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में उत्तर दीजिए:
महामना मालवीय: वाराणसी - नगरे के विश्वविधायाश्य संस्कृतमं कोट?
निम्नलिखित में से किसी दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में उत्तर दीजिए:
दुर्धर्ष: कस्य प्रश्नावत आस्थात चलोलभन्त?
बढ़ती जनसंख्या और देश का भविष्य।
राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका।
भारत में आतंकवाद की समस्या।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान।
भाषा और संस्कृति पर आधारित गद्यांश
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परम्परा से निर्मित होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक अद्यतनों के प्रभाव के कारण उत्पन्न नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नये प्रयोगों की, नयी भाव-भूमियों को व्यक्त करने के लिए नये शब्दों की खोज की महती आवश्यकता है।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
यह अनुभव कितना चमत्कारी है कि जहाँ जो जितनी अधिक बुझी है वह उतनी ही उत्तम, मुस्कानमयी है। यह किस दीपक की ज्योति है? जागरूक जीवन की। लक्ष्यशील जीवन की। सेवा-निष्ठ जीवन की\! अपने विश्वासों के साथ एकता जीवन की। भाषा के भेद रहे, रहेंगे भी, पर यह ज्योति विश्व की सर्वात्मा ज्योति है।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
रमणीयता और नित्य नवीनता अन्योन्याश्रित हैं। रमणीयता के अभाव में कोई भी चीज़ मान्य नहीं होती।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
जन का प्रवाह अनंत होता है। सहस्रों वर्षों से भूमि के साथ राष्ट्रीय जन ने तादात्म्य प्राप्त किया है जब तक सूर्य की रश्मियाँ नित्य प्रातःकाल भुवन को अमृत से भर देती हैं तब तक राष्ट्रीय जन का जीवन भी अमर है। इतिहास के अनेक उतार-चढ़ाव पार करने के बाद भी ऋषि-निवासी जन ने उठती लहरों से आगे बढ़ने के लिए अमर-अमर है।
अपितु गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
भाषा संस्कृत की संस्कृत और वाहक होती है। भाषा की गम्भीरता न केवल स्थान की महत्वपूर्ण है, संस्कृत पर भी प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक देश की शिक्षा का एक मनोरंजन आधार उसकी अपनी भाषा होती है, जो व्यक्ति की दिमागी मति का श्रेष्ठ रूप में प्रसार करती है। यह शिक्षा को स्थान देने में सहायक होती है। देश की भाषा का महत्व समझने के बाद यह माना जाता है कि भारत में संस्कृत का वास्तविक सम्मान भी दिया जाना चाहिए।
अपितु गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
यह सत्य है कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर वरिष्ठ नागरिकों की अपनी अनेक शारीरिक व्याधियाँ शुरू हो जाती हैं, परंतु जब उनकी वास्तविक समस्या मानसिक होती है। यह मान लिया जाता है कि अब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक श्रम के योग्य नहीं रहा, चाहे वह स्वस्थ ही क्यों न हो। इस स्थिति में व्यक्ति की आर्थिक उपार्जन में कमी आती है, वह सामाजिक रूप से भी अनुपयोगी मान लिया जाता है। वह समाज और परिवार की नज़रों में 'बोझ', 'अनुपयोगी' जैसा महसूस करता है और मानसिक पीड़ा होती है।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
साहित्य, कला, नृत्य, गीत, आमोद-प्रमोद अनेक रूपों में राष्ट्रीय जन अपने-अपने मानसिक भावों को प्रकट करते हैं। आत्मा का जो विश्वव्यापी आनंद भाव है वह इन विविध रूपों में साकार होता है । यद्यपि बाह्य रूप की दृष्टि से संस्कृति के ये बाहरी लक्षण अनेक दिखायी पड़ते हैं, किंतु आंतरिक आनंद की दृष्टि से उनमें एकसूत्रता है । जो व्यक्ति सहृदय है, वह प्रत्येक संस्कृति के आनंद पक्ष को स्वीकार करता है और उससे आनंदित होता है। इस प्रकार की उदार भावना ही विविध जनों से बने हुए राष्ट्र के लिए स्वास्थ्यकर है ।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पुष्पित अशोक को देखकर मेरा मन उदास हो जाता है। इसलिए नहीं कि सुंदर वस्तुओं को हतभाग्य समझने में मुझे कोई विशेष रस मिलता है । कुछ लोगों को मिलता है। वे बहुत दूरदर्शी होते हैं । जो भी सामने पड़ गया, उसके जीवन के अंतिम मुहूर्त तक का हिसाब वे लगा लेते हैं । मेरी दृष्टि उतनी दूर तक नहीं जाती । फिर भी मेरा मन इस फूल को देखकर उदास हो जाता है । असली कारण तो मेरे अंतर्यामी ही जानते होंगे, कुछ थोड़ा-सा मैं भी अनुमान कर सकता हूँ
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है।बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी से। कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है।बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-सतिस की सत्य-कलित कलंक-कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने-समझाने की बुद्धि का अनुभव करते हैं।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपेक्षित था।सुतरीयों के आंसिज्जनकनी सुस्पष्ट चरणों के मुख आधार से वह फूलता था, कोमल कणों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अंजलि शोकों को सौ गुना बढ़ा देती थी।वह महाशोक के मन में मोह पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चिन्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोज्ञान देवता के एक इशारे पर कन्ये पर से ही झूट उठता था।
उपर्युक्त गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम अस्तित्व में आनेवाले एककोशिकीय जीव भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों के के कारण धीरे-धीरे विकसित होते गए।
About गद य श पर आध र त प रश न - UP-BOARD-XII
गद य श पर आध र त प रश न is a vital chapter for UP-BOARD-XII aspirants. Mastering the concepts covered in this chapter is essential for securing a top rank.
By rigorously practicing the previous year questions associated with this chapter, you can identify high-yield topics, understand the examiner's perspective, and boost your confidence during the actual exam.
Frequently Asked Questions
Why focus on गद य श पर आध र त प रश न PYQs?
Analyzing PYQs for this specific chapter reveals the most frequently tested concepts and the typical complexity of questions, allowing you to tailor your study plan efficiently.
How to best use this analysis?
Review the topic breakdown to see which sub-topics within गद य श पर आध र त प रश न carry the most weight. Then, tackle the questions iteratively to solidify your understanding.