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Chapter Questions 103 MCQs
'समन्वय' पत्रिका के सम्पादक रहे हैं:
प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषता नहीं है:
'पवन-दृशिका' काव्यांश के रचनिता हैं:
छायावाद युग की कृति है:
भारतीय पुनर्निर्माणकवि कौन हैं?
हिंदी के प्रथम डायरी लेखक हैं:
'विकलांग श्रद्धा का दौर' निबंध-संग्रह के लेखक हैं:
'धूसरवाणी' किस विधा की रचना है?
'द्विवेदी-युग' के लेखक हैं:
'प्राचेतस' पत्रिका के संपादक थे:
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावाद का नहीं है?
'पलाशवन' काव्य-संकलन के प्रेरक हैं:
'कृष्ण' के रचनाकार हैं:
अलीला का विस्तृत वर्णन 'साकेत' महाकाव्य के किस कर्म में है?
'बहतर' कहानी के लेखक हैं:
'रंग का स्वरूप' निबंध-विविधकरण अवलोकन के किस निबंध-संग्रह से लिया गया है?
'उसे कहा था' कहानी के लेखक हैं:
'विवातिन' विचार-संग्रह के लेखक हैं:
'आवरण की समस्या' के लेखक हैं:
'अभिनव मधु' काव्यांश के रचनाकार हैं
'विवंश' के रचनाकार हैं
'धर्म के प्रति अनास्था' तथा 'शोषक वर्ग के प्रति घृणा' किस वाद की प्रमुख विशेषता है?
'राम की शक्ति पूजा' के रचनाकार हैं
'भारतेन्दु युग' से सम्बद्ध नहीं है
प्रो० जी० सुंदर रेड्डी द्वारा लिखित निबंध है
'हमेरे आंगन चहकने द्वार' के रचनाकार हैं
स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना है
नाटक नहीं है
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का प्रथम मौलिक उपन्यास निम्न में से किसको माना है?
'छायावाद' की रचना नहीं है
'परमाल रसों' का रचना काल है
'रामचरितमानस' की रचना किस भाषा में हुई है?
'अंधा युग' रचना के लेखक हैं
'मैला आँचल' उपन्यास है
'कफन' किस विधा की रचना है?
'शेखर: एक जीवनी' के लेखक हैं
'माधुरी' पत्रिका किस युग में प्रकाशित हुई?
'बहुत दूर' अथवा 'खून का रिश्ता' कहानी के उद्धरण पर प्रकाश डालिए।
'महाकाव्य' के नीचे काव्यकृति है:
मैथिलीशरण गुप्त की रचना है:
प्रयोगवादी कवि नहीं हैं:
'प्रगतिवाद' गुट के कवि हैं:
सुमित्रानंदन पंत का काव्य-संग्रह है:
'इंद्रधनुष' कहानी-संग्रह के लेखक हैं:
आलोचना साहित्य 'कालिदास की लालित्य योजना' के लेखक हैं:
वायुदेव शरण अग्रवाल लेखक हैं:
'फूटे विम्ब चेहरे' कृति के लेखक हैं:
'क्षीरोद' की 'ठेठ हिंदी का ठाठ' कृति की विधा है:
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हमारी युवा शक्ति से संपर्क काम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वप्निम युवा के लिए काम करना सही हैं! आज जो कुछ भी कर रहे हैं वह आपके ह्रदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्तित दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकते।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हमारी युवा शक्ति से संपर्क काम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वप्निम युवा के लिए काम करना सही हैं! आज जो कुछ भी कर रहे हैं वह आपके ह्रदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्तित दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकते।
उपयुक्त विचारों के पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
सुमित्रानंदन पंत की 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार प्राप्त काव्यकृति है
'कविता वाणी के डिक्टेटर हैं' - यह कथन है
छायावाद शैली के प्रति सूक्ष्म का विरोध है - यह कथन है
हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है
'चाँद का मुँह टेढ़ा है' के रचनाकार हैं
'रानी केतकी की कहानी' के लेखक हैं
'वेणु की प्रतिध्वनि' किस कवियत्री को कहा जाता है?
सुमित्रानंदन पंत ने 'नौका विहार' कविता की रचना किस स्थान पर रहकर की?
हिंदी काव्य के किस कालखण्ड को 'स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह' कहा गया है?
'एकांतवासी योगी' किसकी रचना है?
'उपमान मैले हो गए हैं' किसकी काव्यपंक्ति है?
'सरोज-स्मृति' कविता के रचनाकार हैं:
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की रचना है:
'चिंतामणि' रचना के लेखक हैं:
'ब्राह्मण' पत्र का संपादन किया था:
निम्नलिखित में से कौन-सा उपन्यास जैनेंद्र द्वारा लिखित है?
'घुमक्कड़ शास्त्र' के लेखक हैं:
'मेरी असफलताएँ' किस विधा की रचना है?
'पल्लव' से उद्धृत कविता 'परिवर्तन' के रचयिता हैं:
'तीसरा सप्तक' का प्रकाशन वर्ष है:
प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं:
'हुंकार' काव्य के रचयिता हैं:
भारतेन्दुयुगीन कवि हैं:
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' की रचना है:
हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास है:
'ब्राह्मण' पत्रिका के संपादक हैं:
गुलाबराय की रचना 'भरी असफलताएँ' की विधा है:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी गद्य की प्रथम पुस्तक माना है:
छायावादी - युग के प्रमुख आलोचक हैं
'गोदान' किस विधा की रचना है?
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हमारी युवा शक्ति से संपर्क काम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वप्निम युवा के लिए काम करना सही हैं! आज जो कुछ भी कर रहे हैं वह आपके ह्रदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्तित दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकते।
लेखक का युवा - शक्ति से संपर्क काम करने के फैसले का आधार क्या रहा है?
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हमारी युवा शक्ति से संपर्क काम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वप्निम युवा के लिए काम करना सही हैं! आज जो कुछ भी कर रहे हैं वह आपके ह्रदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्तित दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकते।
हम अपने आस - पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कब कर सकते हैं?
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हमारी युवा शक्ति से संपर्क काम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वप्निम युवा के लिए काम करना सही हैं! आज जो कुछ भी कर रहे हैं वह आपके ह्रदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्तित दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकते।
'अभिव्यक्तित' तथा 'प्रसार' का अर्थ लिखिए।
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना विधियाँ हैं और वे उसे प्रवृत्त रखती हैं। उस प्रवृत्ति से वह रह-रहकर थक जाता है और निरुत्साही चाहता है। यह प्रवृत्ति और निरुत्साही का चक्र उसको द्रवणद्व से थका मरा है। इस संसार को अभी राग-भाव से वह चाहता है कि अगले क्षण उसमें ही भाव-विराग से वह उसका विनाश चाहता है। पर राग-द्वेश की वास्तविकताओं से अंत में संतुलन और छटपटाहट उसे हाथ आती है।
उपयुक्त गद्यांश के पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना विधियाँ हैं और वे उसे प्रवृत्त रखती हैं। उस प्रवृत्ति से वह रह-रहकर थक जाता है और निरुत्साही चाहता है। यह प्रवृत्ति और निरुत्साही का चक्र उसको द्रवणद्व से थका मरा है। इस संसार को अभी राग-भाव से वह चाहता है कि अगले क्षण उसमें ही भाव-विराग से वह उसका विनाश चाहता है। पर राग-द्वेश की वास्तविकताओं से अंत में संतुलन और छटपटाहट उसे हाथ आती है।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना विधियाँ हैं और वे उसे प्रवृत्त रखती हैं। उस प्रवृत्ति से वह रह-रहकर थक जाता है और निरुत्साही चाहता है। यह प्रवृत्ति और निरुत्साही का चक्र उसको द्रवणद्व से थका मरा है। इस संसार को अभी राग-भाव से वह चाहता है कि अगले क्षण उसमें ही भाव-विराग से वह उसका विनाश चाहता है। पर राग-द्वेश की वास्तविकताओं से अंत में संतुलन और छटपटाहट उसे हाथ आती है।
प्रवृत्ति-निवृत्ति के चक्र में फँसा मनुष्य क्यों थक जाता है?
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना विधियाँ हैं और वे उसे प्रवृत्त रखती हैं। उस प्रवृत्ति से वह रह-रहकर थक जाता है और निरुत्साही चाहता है। यह प्रवृत्ति और निरुत्साही का चक्र उसको द्रवणद्व से थका मरा है। इस संसार को अभी राग-भाव से वह चाहता है कि अगले क्षण उसमें ही भाव-विराग से वह उसका विनाश चाहता है। पर राग-द्वेश की वास्तविकताओं से अंत में संतुलन और छटपटाहट उसे हाथ आती है।
प्रेम और ईर्ष्या की वस्तनाओं में पड़कर मनुष्य की स्थिति कैसी हो जाती है?
निम्नलिखित विचारों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
इच्छाएँ नाना हैं और नाना विधियाँ हैं और वे उसे प्रवृत्त रखती हैं। उस प्रवृत्ति से वह रह-रहकर थक जाता है और निरुत्साही चाहता है। यह प्रवृत्ति और निरुत्साही का चक्र उसको द्रवणद्व से थका मरा है। इस संसार को अभी राग-भाव से वह चाहता है कि अगले क्षण उसमें ही भाव-विराग से वह उसका विनाश चाहता है। पर राग-द्वेश की वास्तविकताओं से अंत में संतुलन और छटपटाहट उसे हाथ आती है।
कौन सा द्रवणद्व व्यक्ति को थका देता है?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
प्रस्तुत पद्यांश के पाठ और इसके लेखक का नाम लिखिए।
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
प्रवृत्ति-निवृत्ति के चक्र में फँसा मनुष्य क्यों थक जाता है?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
प्रेम और ईर्ष्या की वस्तनाओं में पड़कर मनुष्य की स्थिति कैसी हो जाती है?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
कौन सा द्रवणद्व व्यक्ति को थका देता है?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
तरिणी-तनुजा तट तमाल तस्बर बहु धाये।
झुके कल सौ जल परस्मि हित मंहुं स्मुहाय।
किंचित् मन्मुखं लक्षणं उस्मिक, सब निज-निज सोभा।
कै प्रभाव जल जानि परम पावन फल लोभा।
मनु आत्मा बारं तीर के समिटे सब हाये रहता।
के हरि सेवा हित ने रहेनि बैन मन सुख रहता।
उपयुक्त पद्यांश के पाठ और इसके लेखक का नाम लिखिए।
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
तरिणी-तनुजा तट तमाल तस्बर बहु धाये।
झुके कल सौ जल परस्मि हित मंहुं स्मुहाय।
किंचित् मन्मुखं लक्षणं उस्मिक, सब निज-निज सोभा।
कै प्रभाव जल जानि परम पावन फल लोभा।
मनु आत्मा बारं तीर के समिटे सब हाये रहता।
के हरि सेवा हित ने रहेनि बैन मन सुख रहता।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
तरिणी-तनुजा तट तमाल तस्बर बहु धाये।
झुके कल सौ जल परस्मि हित मंहुं स्मुहाय।
किंचित् मन्मुखं लक्षणं उस्मिक, सब निज-निज सोभा।
कै प्रभाव जल जानि परम पावन फल लोभा।
मनु आत्मा बारं तीर के समिटे सब हाये रहता।
के हरि सेवा हित ने रहेनि बैन मन सुख रहता।
इस पद में किसका मनोहर चित्रण किया गया है?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
तरिणी-तनुजा तट तमाल तस्बर बहु धाये।
झुके कल सौ जल परस्मि हित मंहुं स्मुहाय।
किंचित् मन्मुखं लक्षणं उस्मिक, सब निज-निज सोभा।
कै प्रभाव जल जानि परम पावन फल लोभा।
मनु आत्मा बारं तीर के समिटे सब हाये रहता।
के हरि सेवा हित ने रहेनि बैन मन सुख रहता।
यमुनातट पर तमाल के झुके हुए वृक्ष किस प्रकार के प्रतीत हो रहे हैं?
निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
तरिणी-तनुजा तट तमाल तस्बर बहु धाये।
झुके कल सौ जल परस्मि हित मंहुं स्मुहाय।
किंचित् मन्मुखं लक्षणं उस्मिक, सब निज-निज सोभा।
कै प्रभाव जल जानि परम पावन फल लोभा।
मनु आत्मा बारं तीर के समिटे सब हाये रहता।
के हरि सेवा हित ने रहेनि बैन मन सुख रहता।
जल रूपी दर्पण में अपनी शोभा कौन देख रहा है?
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए: (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
वासुदेवशरण अग्रवाल
पं. दिनदयाल उपाध्याय
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं को लिखिए: (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
रामधारी सिंह 'दिनकर'
जयशंकर प्रसाद
बालकृष्ण भट्ट द्वारा संपादित पत्रिका है
'नास्तिकेतोपाख्यान' के रचनाकार हैं
कर्मनाशा की हार कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।