क व य श पर आध र त प रश न
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Chapter Questions 6 MCQs
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल यह काव्य पंक्ति है ?
वैदेही वनवास रचना है:
पूरी होवें न यदि तुझसे अन्य बातें हमारी।
तो तू, मेरी विनय इतनी मान ले और चली जा।
छू के प्यारे कमल-पग को प्यार के साथ आ जा।
जी जाऊंगी हृदय-तल में मैं तुझी को लगाके।
कथा मनु ने, नम धरणी भीष।
बना जीवन रहस्य, निरुपाय।
एक उल्लास-सा जलता भ्रांत।
शून्य में फिरता हूँ असहाय।
कौन हो तुम वसंत के दूत।
विरस पत्तझड़ में अति सुकुमार।
धन तिमिर में चपला की रेख।
तपन में शीतल मंद बयार।
निम्नलिखित पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
लज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आये ।
होने देना विकृत वसना तो न तू सुन्दरी को ।
जो थोड़ी भी श्रमित वह हो, गोद ले श्रांति खोना ।
होठों की औ कमल-मुख की म्लानताएँ मिटाना ।
कोई क्लान्ता कृषक-ललना खेत में जो दिखावे ।
धीरे-धीरे परस उसकी क्लान्तियों को मिटाना ।।
बनो संसृति मूल रहस्य, तुम्हीं से फैलेगी यह बेल
विश्व वन सौरभ से भर जाय सुमन के खेलो सुन्दर खेल ॥
और यह क्या तुम सुनते नहीं विधाता का मंगल वरदान
शक्तिशाली हो विजयी बनो विश्व में गूँज रहा जय गान ॥