क व य व श ल षण
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Chapter Questions 12 MCQs
'मैं नीर भरी दुःख की बदली' काव्य पंक्ति के रचनाकार हैं।
'खड़ी बोली' का प्रथम महाकाव्य है।
शान्त, स्निग्ध ज्योत्सना उज्वल । अपलक अनंत नीरव भू-तल !
सैकत- शय्या पर दुग्ध-धवल तन्वंगी गंगा, ग्रीष्म विरल,
लेटी हैं श्रांत, क्लांत, निश्चल ।
तापस- बाला-सी गंगा कल निर्मल, शशि-मुख से दीपित मृदु-करतल,
लहरें उर पर कोमल कुंतल ।
गोरे अंगों पर सिहर सिहर, लहराता तार-तरल सुन्दर
चंचल अंचल सा नीलाम्बर ।
साड़ी की सिकुड़न-सी जिस पर, शशि की रेशमी - विभा से भर सिमटी हैं वर्तुल मृदुल लहर ।
चाँदनी रात का प्रथम प्रहर, हम चले नाव लेकर सत्वर ।
'चाँद का मुँह टेढ़ा है' रचना की विधा है।
हिन्दी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है:
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ रीतिकालीन काव्य-परंपरा से सम्बन्धित है?
'सामधेनी' काव्य के रचयिता हैं:
'कठिन काव्य के प्रेत' कहे जाते हैं:
'तीसरा सप्तक' का प्रकाशन वर्ष है:
सावधान, मनुष्य ! यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे दे फेंक, तज कर मोह, स्मृति के पार ।
हो चुका है सिद्ध, है तू शिशु अभी नादान;
फूल - काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान ।
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार;
काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
कृपानिधान सुजान संभु हिय की गति जानी ।
दियौ सीस पर ठाम बाम करि कै मनमानी ।
सकुचति ऐचति अंग गंग सुख संग लजानी ।
जटाजूट हिम कूट सघन बन सिमिरि समानी ।
भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती | तस्या हिं मधुरं काव्यं तस्मादपि सुभाषितानि ।।