CBSE-CLASS-XII SERIES
Hindi-elective

क व य श पर आध र त प रश न

14 previous year questions.

Volume: 14 Ques
Yield: Medium

High-Yield Trend

14
2025

Chapter Questions
14 MCQs

01
PYQ 2025
easy
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :

जननी निरखति बान धनुहियाँ ।
बार बार उर नैननि लावति प्रभुजू की ललित पनहियाँ ।।
कबहुँ प्रथम ज्यों जाइ जगावति कहि प्रिय बचन सवारे ।
“उठहु तात ! बलि मातु बदन पर, अनुज सखा सब द्वारे” ।।
कबहुँ कहति यों “बड़ी बार भइ जाहु भूप पहँ, भैया ।
बंधु बोलि जेंइय जो भावै गई निछावरि मैया”
कबहुँ समुझि वनगमन राम को रहि चकि चित्रलिखी सी ।
तुलसीदास वह समय कहे तें लागति प्रीति सिखी सी ।।

02
PYQ 2025
easy
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

कुछ लोग हमारे पड़ोसी भी थे
और हम भी थे किसी के पड़ोसी
अब जाकर यह ख्याल आता है।

``पड़ोसियों को कह कर आए हैं दो-चार दिन घर देख लेना''
यह वाक्य कहे-सुने अब एक अरसा हुआ है।

हथौड़ी कुदाल कुएँ से बाल्टी निकालने वाला
लोहे का काँटा, दतुवन, नमक हल्दी, सलाई
एक-दूसरे से ले-देकर लोगों ने निभाया है
लंबे समय तक पड़ोसी होने का धर्म

धीरे-धीरे लोगों ने समेटना कब शुरू कर दिया खुद को,
यह ठीक-ठीक याद नहीं आता
अब इन चीज़ों के लिए कोई पड़ोसियों के पास नहीं जाता

याद में शादी-ब्याह का वह दौर भी कौतूहल से भर देता है
जब पड़ोसियों से ही नहीं पूरे गाँव से
कुर्सियाँ और लकड़ी की चौकियाँ तक
बारातियों के लिए जुटाई जाती थीं

और लोग सौंपते हुए कहते थे -
बस ज़रा एहतियात से ले जाइएगा!

बस अब इस नई जीवन शैली में
हमें पड़ोसियों के बारे में कुछ पता नहीं होता
कैसी है उनकी दिनचर्या और उनके बच्चे कहाँ पढ़ते हैं?
वह स्त्री जो बीमार-सी दिखती है, उसे हुआ क्या है?
किसके जीवन में क्या चल रहा है?
कौन कितनी मुश्किलों में है?

हमने एक ऐसी दुनिया रची है
जिसमें खत्म होता जा रहा है हमारा पड़ोस।

03
PYQ 2025
medium
hindi-elective ID: cbse-cla

नाटक का वास्तविक अनुकरण उसके ‘दृश्य काव्य’ होने में ही है, कैसे? तीन बिंदुओं में अपने तर्क लिखिए।

04
PYQ 2025
easy
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

मैं किसी पर भरोसा करना चाहती हूँ
भरोसा करने के बाद चीज़ें बदल जाती हैं
जैसे कि यह मेज़
जो पहले मुझे ऊँची और खुदगर्ज़ी लगती थी
पर अब मैं इस पर घंटों काम कर सकती हूँ।

तार पर सूखते कपड़े उतारते समय
बरामदे से जो दृश्य दीखता है
उसमें से आती शाम
अधिक हरी होकर आती है
साफ़ और नए लगते हैं उसके कपड़े
जैसे वह कहीं घूमने जा रही हो

स्वप्न में अक्सर
इम्तिहान का कमरा और रेलवे प्लेटफॉर्म
आते थे

गणित, भौतिकशास्त्र और अंग्रेज़ी के पर्चे
ख़राब हो जाते थे
प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचते ही छूट जाती थी रेल
पर अब ऐसा नहीं होता

काम समय पर होते हैं कुछ नहीं भी होते
सब कुछ मगर उतना निराशाजनक नहीं
लगता

अब जबकि
दुनिया एक गाँव बनने जा रही है
और एक विश्व बाज़ार है जिसमें
हम सब बिला जाएँगे

कितना जोखिम भरा शब्द हो गया है भरोसा
और उससे भी बड़ा जोखिम है उसे बचाना
क्योंकि वही बदलता है चीज़ों को
वही बचाता है स्मृतियों को

05
PYQ 2025
medium
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित काव्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
यह जन है — गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा?
पनडुब्बा — ये मोती सच्चे फिर कौन कूती लाएगा?
यह सम्भावना — ऐसी आग हटेगा बिसला सुलगाएगा।
यह अदितीय — यह मेरा — यह मैं स्वयं विसर्जित —
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्तियों को दे दो।

06
PYQ 2025
medium
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
जो है वह खड़ा है
बिना किसी स्तंभ के
जो नहीं है उसे थामे है
राख और रोशनी के ऐनै–ऐनै स्तंभ
आग के स्तंभ
और पानी के स्तंभ
धुएँ के
खुशबू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ
किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्घ्य
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टाँग से
बिलकुल बेखबर!

07
PYQ 2025
medium
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
एहि मास उपजै रस मूलु। तूँ सो भँवर मोर जोबन फूलु॥
नैन चुवहिं जस माँहुट नीरु। तोहि जल अंग लाग सर चीरु॥
टूटहिं बूँद परहिं जस ओला। बिहर पवन होई मारे झोला॥
केहिक सिंगार को पहिर पटोरा। गियाँ नहीं हार रही होइ डोरा॥

08
PYQ 2025
easy
hindi-elective ID: cbse-cla

निम्नलिखित पाठ्य काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :
"मुझ भाग्यहीन की तू संबल
युग वर्ष बाद जब हुई विकल
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी धर्म पर वज्रपात
यदि धर्म, रहे नत सदा माथ
इस पथ पर, मेरे कार्य सकल
हो भ्रष्ट शिथिल के-से शरतल!
कन्ये, गत कर्मों का अर्पण
कर, करता मैं तेरा तर्पण!"

09
PYQ 2025
easy
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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
वृद्धाएँ धरती का नमक हैं,
किसी ने कहा था!
जो घर में हो कोई वृद्धा –
खाना ज्यादा अच्छा पकता है,
परदे-पेटिकोट और पायजामे भी दर्जी और
फ़ूफ़ाओं के
मुहताज नहीं रहते,
सजा-धजा रहता है घर का हर कमरा,
बच्चे ज़्यादा अच्छा पलते हैं,
उनकी नन्हीं-मुन्नी उल्टियाँ सँभालती
जगती हैं वे रात-भर,
घुल जाती हैं बच्चों के सपनों में
हिमालय-विमालय की अटल कंदराओं की
दिव्यवर्णी-दिव्यगंधी जड़ी-बूटियाँ और
फूल-वूल!
उनके ही संग-साथ से भाषा में बच्चों की
आ जाती है एक अनजव कोंपल
मुहावरों, मिथकों, लोकोक्तियों,
लोकगीतों, लोकगाथाओं और कथा-समयों की।
उनके ही दम से
अतल कूप खुद जाते हैं बच्चों के मन में
आदिम स्मृतियों के।
रहती हैं बुढ़ुआँ, घर में रहती हैं
लेकिन ऐसे जैसे अपने होने की खातिर हों
क्षमाप्रार्थी
– लोगों के आते ही बैठक से उठ जातीं,
छुप-छुपकर रहती हैं छाया-सी, माया-सी!
पति-पत्नी जब भी लड़ते हैं उनको लेकर
कि तुम्हारी माँ ने दिया क्या, किया क्या–
कुछ देर वे करती हैं अनसुना,
कोशिश करती हैं कुछ पढ़ने की,
बाद में टहलने लगती हैं,
और सोचती हैं बेचैनी से – ‘गाँव गए बहुत दिन हुए!’
उनके बस यह सोचने-भर से
जादू से घर में सब हो जाता है ठीक-ठाक,
सब कहते हैं, ‘अरे, अभी कहाँ जाओगी,
अभी तो नहीं जाना है बाहर, बच्चों को रखेगा
कौन?’
कपड़ों की छाती जब फटती है –
खुल जाती है उनकी उपयोगिता।

10
PYQ 2025
easy
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निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :

अरुण यह मधुमय देश हमारा!
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।

सरस तामरस गर्भ विभा पर -- नाच रही तरलिका मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर -- मंगल कुंकुम सारा!

लघु मधुन्धु से पंक पंकारे -- शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस और मुँह किए -- समझ नीड निज प्यारा।

बरसाती आँखों के बादल -- बनते जहाँ भरे करुणा जल
लहरें टकराती अनंत की -- पाकर जहाँ किनारा।

हैम्ब-कुंभ ले उषा सवेरा -- भरती दुलाकाँति सुघ मेरे
मंदिर ऊँघते रहते जब -- जागकर रजनी भर तारा।

11
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निम्नलिखित पवित्र काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए :

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढे । नीरज नयन नेह जल बाढे ॥
कबहुँ भरे मुनिनाथ निबाहा । एहि ते अधिक कहाँ मैं काहा ॥

मैं जानउँ प्रभु नाथ सुभाऊ । अपराधि पर कोप न राउ ॥
मो पर कृपा सदेइ बिसेषी । खेलत खुशी न कहूँ देखी ॥

सिपुन्स में परिहउँ न संगू । कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू ॥
हे प्रभु कृपा तिन्ह जियं जोही । हारहूँ खेल जितावहिं मोही ॥

मूंह नहेइ सकौं बस समुख कह न बैसि ।
दास तृपति न आतु लगी पाप पियाउस नै ॥

12
PYQ 2025
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

जहाँ भूमि पर पड़ा कि
सोना धँसता, चाँदी धँसती
धँसती ही जाती पृथ्वी में
बड़ों–बड़ों की हस्ती।

शक्तिवान जो हुआ कि
बैठा भू पर आसन मारे
खा जाते हैं उसको
मिट्टी के ढेले हत्यारे।

मातृभूमि है उसकी, जिसका
उठके जीना होता है,
दहन–भूमि है उसकी, जो
क्षण–क्षण गिरता जाता है,
भूमि खींचती है मुझको भी
नीचे धीरे–धीरे
किंतु लहराता हूँ मैं नभ पर
शीतल–मंद–समीर।

काला बादल आता है
गुरु गर्जन स्वर भरता है
विद्रोही–मस्तक पर वह
अभिषेक किया करता है।
विद्रोही हैं हमीं, हमारे
फूलों से फल आते हैं
और हमारी कुरबानी पर
जड़ भी जीवन पाते हैं।

13
PYQ 2025
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‘सरोज स्मृति’ कवि का एक शोक गीत है। तर्कपूर्ण उत्तर से सिद्ध कीजिए।

14
PYQ 2025
easy
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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल बिंधूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं।

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की संपत्ति चाहूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं।

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही
वरदान माँगूँगा नहीं।

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं त्यागूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं।

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं।

About क व य श पर आध र त प रश न - CBSE-CLASS-XII

क व य श पर आध र त प रश न is a vital chapter for CBSE-CLASS-XII aspirants. Mastering the concepts covered in this chapter is essential for securing a top rank.

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